Public Corporation Features , Characteristics in Hindi सार्वजनिक निगम की मुख्य विशेषताएं

Public Corporation : सार्वजनिक निगम की मुख्य विशेषताएं

पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन पब्लिक कॉर्पोरेशन

Public Corporation Features , Characteristics in Hindi सार्वजनिक निगम की मुख्य विशेषताएं – आधुनिक युग में सार्वजनिक निगम एक महत्वपूर्ण सूत्र एजेंसी है। वर्तमान समय में संसार के प्रत्येक देश में व्यापारिक और औद्योगिक कार्यों के प्रबंध के लिए सार्वजनिक निगमों का प्रबंध किया जा रहा है।

YouTube Channel download
Telegram Group images

सार्वजनिक निगमों की स्थापना सबसे पहले पश्चिमी देशों में हुई थी। भारत में भी सार्वजनिक निगमों का काफी विकास हुआ है और देश के सर्वांगीण विकास में इनकी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत में भारतीय जीवन बीमा निगम, भारत का खाद्य निगम ,रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, दामोदर घाटी निगम आदि सार्वजनिक निगम के महत्वपूर्ण उदाहरण है।

सार्वजनिक निगम की मुख्य विशेषताएं ( Public Corporation Features , Characteristics in Hindi )

सार्वजनिक निगम की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है –

राज्य का पूर्ण स्वामित्व ( Full Ownership of the State )

सार्वजनिक निगमों पर सरकार का पूर्ण स्वामित्व होता है अर्थात ऐसे उद्यमों में समस्त पूंजी सरकार द्वारा लगाई जाती है। इससे होने वाली समस्त आय और व्यय भी सरकार का ही होता है । याद रहे कि ऐसे निगमों में किसी भी तरह के निजी क्षेत्र का हस्तक्षेप नहीं होता है।

यह भी पढ़े –

विशेष कानून द्वारा स्थापित ( Constitute under special law )

प्रत्येक सार्वजनिक निगमों की स्थापना के लिए विधानमंडल द्वारा विशेष कानून का निर्माण किया जाता है जिसमें सार्वजनिक निगम के उद्देश्य ,शक्तियों ,कार्य और अन्य समस्त गतिविधियों का वर्णन किया जाता है।

व्यापारिक उद्यमों के लिए उचित ( Suitable for Business Enterprises )

निगम प्रणाली का प्रयोग व्यापारिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बड़ी सफलता से किया जाता है। व्यापार में सफलता तभी मिल सकती है ,यदि मंडी के बदलते हुए मूल्यों के अनुसार स्वयं को ढाला जाए। सार्वजनिक निगम ही एक ऐसा संगठन है जिसमें यह लक्षण विद्यमान है। परंतु फिर भी इसे जनकल्याण के कार्यों की तरफ अधिक ध्यान देना चाहिए क्योंकि जनकल्याण इसका मूल उद्देश्य है।

वित्तीय स्वायत्तता ( Financial Autonomy )

सार्वजनिक निगमों का एक अन्य महत्वपूर्ण लक्षण इनकी वित्तीय स्वायत्तता अथवा स्वाधीनता होती है जो व्यापार के लिए अत्यावश्यक होती है। सरकारी विभागों की तरह इन्हें अपने व्यय में वृद्धि करने के लिए सरकार से स्वीकृति नहीं लेनी पड़ती। यह अपना सारा बजट तैयार करते हैं और इन्हें अपनी अलग लेखा प्रणाली और लेखा जांच करने की छूट होती है।

यह भी पढ़े –

प्रशासकीय स्वायत्तता ( Administrative Autonomy )

सार्वजनिक निगमों को प्रशासकीय क्षेत्रों में स्वायत्तता प्राप्त होती है जो कि इसकी सफलता के लिए आवश्यक होती है। इसके प्रबंध के लिए लचीलापन होना बहुत आवश्यक है ताकि आवश्यकता पड़ने पर यह अपनी प्रशासकीय नीतियों में बिना किसी बाधा के शीघ्र ही परिवर्तन कर सके।

सरकारी विभागों की तरह यदि सार्वजनिक निगमों को प्रत्येक बात के लिए सरकार की पूर्ण स्वीकृति की आवश्यकता पड़े तो उसके बाजार में प्रवेश होने से पूर्व बाजार की परिस्थितियां बदल चुकी होगी। इस संबंध में हरबर्ट मॉरिसन का कहना है कि प्रशासन संबंधी बोर्डों को काफी सीमा तक स्वतंत्रता मिलना व्यापारिक कुशलता के लिए आवश्यक है।

यह भी पढ़े –

न्यायिक स्वरूप ( Judicial Character )

सार्वजनिक निगम की स्थापना संसद के कानून के अधीन किया जाता है। इस का दर्जा वैधानिक व्यक्ति का होता है जो कि किसी के विरुद्ध मुकदमा चला सकता है और इसके विरूद्ध भी मुकदमा चलाया जा सकता है। इसके पास अपनी संपत्ति होती है और इसलिए वह पृथक पृथक वित्तीय समझौते भी कर सकती है।

स्वतंत्र कर्मचारी वर्ग व्यवस्था ( Independent Personnel System )

सरकार के भिन्न भिन्न विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों को असैनिक कर्मचारी कहा जाता है। परंतु सार्वजनिक निगमों में प्रतिनियुक्ति पर सरकारी विभागों में आए कर्मचारियों को छोड़कर शेष निगम के अपने कर्मचारी होते हैं जिन्हें असैनिक कर्मचारी नहीं कहा जाता । सार्वजनिक निगमों की अपनी पृथक व्यवस्था होती है जिसके अनुसार कर्मचारियों की भर्ती और आवश्यक प्रबंध किए जाते हैं।

यह भी पढ़े –

FAQ Checklist

सार्वजनिक निगमों पर सरकार का पूर्ण स्वामित्व क्यो होता हैं ?

सार्वजनिक निगमों पर सरकार का पूर्ण स्वामित्व होता है अर्थात ऐसे उद्यमों में समस्त पूंजी सरकार द्वारा लगाई जाती है। इससे होने वाली समस्त आय और व्यय भी सरकार का ही होता है । याद रहे कि ऐसे निगमों में किसी भी तरह के निजी क्षेत्र का हस्तक्षेप नहीं होता है।

सार्वजनिक निगम की स्थापना कैसे होती है ?

सार्वजनिक निगम की स्थापना संसद के कानून के अधीन किया जाता है। इस का दर्जा वैधानिक व्यक्ति का होता है जो कि किसी के विरुद्ध मुकदमा चला सकता है और इसके विरूद्ध भी मुकदमा चलाया जा सकता है। इसके पास अपनी संपत्ति होती है और इसलिए वह पृथक पृथक वित्तीय समझौते भी कर सकती है।

सार्वजनिक निगम का उदाहरण क्या है?

संघीय सरकार द्वारा गठित सार्वजनिक प्रयोजन निगमों के कुछ उदाहरणों में शामिल हैं-एमट्रैक , संयुक्त राज्य डाक सेवा,सार्वजनिक प्रसारण के लिए निगम।

सार्वजनिक निगम की मुख्य विशेषताएं क्या है?

सार्वजनिक निगमों पर सरकार का पूर्ण स्वामित्व होता है अर्थात ऐसे उद्यमों में समस्त पूंजी सरकार द्वारा लगाई जाती है। सार्वजनिक निगम की स्थापना संसद के कानून के अधीन किया जाता है। इस का दर्जा वैधानिक व्यक्ति का होता है जो कि किसी के विरुद्ध मुकदमा चला सकता है और इसके विरूद्ध भी मुकदमा चलाया जा सकता है। इसके पास अपनी संपत्ति होती है और इसलिए वह पृथक पृथक वित्तीय समझौते भी कर सकती है।


निगम से आप क्या समझते हैं?

निगम एक विशेषाधिकार प्राप्त स्वतन्त्र कानूनी इकाई के रूप में पहचानी जाने वाली अलग संस्था है जिसके पास अपने सदस्यों से पृथक अपने अधिकार और दायित्व हैं। निगमों के कई प्रकार हैं, जिनमे से अधिकतर का उपयोग व्यापार करने के लिए किया जाता है।

और पढ़े –